जिन्दगी के सफर में चूत का प्रसाद



हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम अली है और में गुजरात का रहने वाला हूँ और आज में जो कहानी आप सभी को सुनने जा रहा हूँ. यह आज से दो साल पहले की एक सच्ची घटना है और उन दिनों में अपने पेपर देकर अपनी छुट्टियों के दिन बिता रहा था और में उस समय कोई भी काम नहीं कर रहा था, लेकिन हाँ में हर दिन अपने एक दोस्त के पास जरुर जाता था जिसका नाम अबरार है.

में और वो उसके घर के बाहर बैठकर कई घंटे बातें किया करते थे और जिस जगह पर हम दोनों बैठे बातें करते थे वहां पर एक घर था जिसमें एक सुंदर लड़की रहती थी जो कि मेरे दोस्त की गर्लफ्रेंड थी जिसका नाम सिद्रा था और इसलिए हम दोनों का वहां पर बैठकर टाइम पास हो जाता था और वैसे उस लड़की के घर में ज्यादा लोग नहीं थे हम अक्सर रात को देर तक वहाँ पर बैठा करते थे और वो भी सही मौका देखकर रात को दरवाजे पर आ जाती थी.

मेरा दोस्त उसके पास चला जाता और उसके बाद वो दरवाजे पर ही एक दूसरे को चूमने लगते थे में इधर उधर देखता था कि कहीं कोई आ ना जाये. अगर कोई आता तो में अपने दोस्त को बता देता था और यह सिलसला बहुत दिनों तक चलता रहा.

एक दिन जब में अपने दोस्त के पास गया तो हम रोज़ की तरह हम दोनों वहीं पर बैठ गए और जब मैंने अपने दोस्त की गर्लफ्रेंड के घर के दरवाजे पर देखा तो मुझे वहां पर सिद्रा और उसके साथ एक और लड़की खड़ी हुई थी.

मैंने उस लड़की को देखा तो देखता ही रह गया, क्योंकि वो लड़की बहुत सुंदर बड़ी गोरी थी. उसका बदन भरा हुआ था और उसके बूब्स बड़े आकार के होने की वजह से उसके कपड़ो से बाहर नजर आ रहे थे. वो बड़े ही मस्त गोल थे, लेकिन वो लड़की थोड़ी सी मोटी भी थी और मेरा दिल उस लड़की पर आ गया था और जब मैंने अपने दोस्त से उसके बारे में पूछा कि यह लड़की कौन है तो उसने मुझे बताया कि यह लड़की मेरी गर्लफ्रेंड की चचेरी बहन है और वो कुछ दिन के लिए यहाँ पर रहने आई हुई है.

मैंने अपने दोस्त से कहा कि तू इस लड़की की मुझसे बात करवा दे तब उसने अपनी गर्लफ्रेंड के पास जाकर उससे मेरी उस बात के बारे में कहा और फिर उसने मुझे दरवाजे पर बुलवाया और फिर मेरी उस लड़की से बात करवाई, तो मैंने उसको उसी समय मुझसे दोस्ती करने के लिए कहा तो वो तुरंत मेरी बात को सुनकर तैयार हो गई और में वापस आया और मैंने अपने दोस्त से कहा कि वो अपनी गर्लफ्रेंड से कहकर मुझे इसकी एक किस दिलवाने की बात कहे.

उसने अपनी दोस्त से यह कहा तो उसने मुझे उस दरवाजे पर किस करने से बिल्कुल मना कर दिया, लेकिन उसने मुझसे मिलने को कहा तो मैंने कहा कि हाँ ठीक है और मैंने उसको एक आइस्क्रीम पार्लर पर मिलने के लिए कहा. मैंने उसको दिन के करीब दो बजे का समय उससे मिलने का दिया और फिर में मन ही मन बड़ा खुश होता हुआ और वापस अपने घर पर आ गया.

फिर अगले दिन में और मेरा दोस्त दो बजे से कुछ मिनट पहले ही उस आइस्क्रीम पार्लर पर पहुंच गए और अब हम दोनों उसका इंतज़ार करने लगे थे. करीब दस मिनट के बाद वो लोग भी आ गए और हमारी क़िस्मत बहुत अच्छी थी कि उस समय उस आइस्क्रीम पार्लर में बस हम चार लोगों के अलावा और कोई भी नहीं था.

मैंने कुछ देर बाद अपने दोस्त से कहा कि वो लोग अलग जाकर दूसरी कुर्सी पर बैठ जाए और हम दोनों को अलग बैठने दो और उसी समय मेरा दोस्त अपनी दोस्त को लेकर दूसरी टेबल पर बैठ गया. अब मैंने उस लड़की से उसका नाम पूछा तब उसने मुझे अपना नाम ताहिरा बताया उसके बाद मैंने उससे इधर उधर की बहुत सारी बातें हँसी मजाक किया और फिर मैंने उससे मुझे किस करने की बात कही.

पहली बार तो उसने मुझसे साफ मना कर दिया, लेकिन जब मैंने दो तीन बार फिर से उससे कहा तब जाकर वो तैयार हो गई तो में बहुत खुश हुआ और उसके साथ जाकर बैठ गया. फिर मैंने उसके गालों से उसको पकड़कर मैंने उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए तब मुझे पता चला कि उसको किस करना नहीं आता था इसलिए उसने अपने होंठो को ज़ोर से बंद कर लिए, लेकिन में उसके नरम होंठो को लगातार चूसता रहा.

धीरे धीरे उसने अपने होंठो को ढीला छोड़ दिया और मैंने उसको करीब पांच मिनट तक किस किया, लेकिन बाद में हम लोगों ने बहुत जमकर किस किया. फिर कुछ देर बाद हम दोनों उठकर अपने दोस्तों के पास चले गए और कुछ देर साथ में बैठकर बातें मजाक करने के बाद हम लोग वापस अपने अपने घर पर आ गए. उस दिन वहां पर मेरे दोस्त ने भी अपनी दोस्त के साथ बड़े मस्त मज़े लिए थे. उसने मुझे वापस आते समय सब कुछ सच सच बता दिया था.

अब मैंने और मेरे दोस्त ने उन दोनों को चोदने का प्लान बनाना शुरू किया और दो दिन के बाद हम दोनों ने एक हमारे काम करने लायक जगह का इंतज़ाम किया और उसके बाद उन दोनों को हमने वहां पर बुला लिया जिस जगह पर हमने उन दोनों को बुलाया था वो घर हमारे ही एक बहुत पक्के दोस्त का था जो वहां पर अपने पापा के साथ रहता था.

उनकी एक दुकान थी और उसके परिवार के बचे हुए लोग उनके गाँव में रहते थे और वो उस घर में अपने पापा के साथ अकेला ही रहता था, लेकिन उसके पापा उस दिन अपने परिवार से मिलने के लिए अपने गाँव गए हुए थे और वो दूसरे दिन तक वापस आने वाले थे इसलिए उसने हम लोगों को कुछ देर के लिए अपने घर की चाबी हम दोनों को दे दी.

हम सभी लोग उसके घर में गये और कुछ देर तक हमने बातें की और फिर उसके बाद मैंने अपने दोस्त से इशारे में दूसरे पास वाले कमरे में जाने के लिए कहा और फिर वो मेरा इशारा तुरंत समझकर उठकर अपनी दोस्त को अपने साथ में लेकर दूसरे रूम में चला गया. अब हम दोनों वहीं उस सोफे पर बैठे रहे कुछ देर बाद मैंने उसका एक हाथ पकड़ लिया और उसके हाथ को किस किया, क्योंकि में तब उसका मूड देखना चाहता था, लेकिन जब उसने मुझे अपना हाथ चूमने पर कुछ नहीं कहा तो मैंने अब आगे बढ़कर उसके होंटो पर किस करना शुरू कर दिया और में उसके रस भरे होंठो को चूसने चूसने लगा था.

उस समय मेरा एक हाथ उसकी गर्दन पर था और अपने दूसरे हाथ से में उसके बूब्स को दबा भी रहा था. अब कुछ देर के बाद मैंने महसूस किया कि अब वो पूरी तरह से गरम हो चुकी थी और मैंने उसको अपनी गोद में बैठा लिया और फिर मैंने उसको होंठो पर चूमना बंद कर दिया. अब मैंने उसकी गर्दन पर किस किया और धीरे धीरे मैंने उसकी कमीज़ के अंदर अपने हाथ को डाल दिया और में उसके बूब्स को दबाने लगा.

तब मैंने छूकर महसूस किया कि उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी हुई थी और मैंने उसको पूरा गरम कर दिया था. फिर मैंने उसकी कमीज़ को उसके बूब्स तक ऊपर उठा दिया और फिर उसकी ब्रा को ऊपर करके में उसके बूब्स को चूसने लगा और दबाने भी लगा था.

में बहुत देर तक उसके बूब्स को चूसता रहा और दबाता भी रहा. अब मैंने सही मौका देखकर उसकी पूरी कमीज़ को उतार दिया और अपनी शर्ट को भी उतारकर उसको मैंने अपने गले से लगा लिया. अब मैंने पीछे से उसकी सलवार में हाथ डालकर में उसकी गांड को दबाने लगा जो कि बहुत ही नरम थी और साथ साथ में उसकी गर्दन पर किस भी कर रहा था और फिर कुछ देर बाद मैंने उसको सोफे पर ही लेटा दिया और में खुद उसके ऊपर लेट गया और अब में उसको किस करने लगा.

मैंने अपना एक हाथ उसकी चूत पर रख दिया और तब मैंने छूकर महसूस किया कि उसकी सलवार चूत वाली जगह से गीली हो गई थी और अब में उसकी चूत पर अपने हाथ को फिरने लगा था. अब में धीरे धीरे अपने हाथ को सलवार के पूरा अंदर ले गया और तब मुझे अहसास हुआ कि उसकी चूत बड़ी ही गरम होने के साथ साथ बिल्कुल चिकनी भी थी उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था और में तुरंत समझ चुका था कि वो आज मुझसे अपनी चुदाई करवाने की पूरी तैयारी में यहाँ पर आई है.

वो आग जो मेरे बदन में लगी है वही आग उसके जिस्म में भी बराबर लगी हुई है, जिसको आज वो मेरे लंड से चुदवाकर ठंडा करना चाहती है. अब में उसकी चूत के कुछ देर सहलाता रहा और उसके बाद मैंने उसकी सलवार को नीचे उतार दिया. दोस्तों में उस समय बहुत हैरान था कि वो मुझे किसी भी काम को करने के लिए रोक नहीं रही थी, बल्कि वो तो खुद भी मेरा उस काम में पूरा पूरा साथ दे रही थी.

अब मैंने अपनी भी पेंट को उतार दिया और में उसके ऊपर लेट गया और उसके बाद में उसको चूमने लगा था. फिर कुछ देर बाद मैंने अपना लंड उसके हाथ में दे दिया और फिर में उसकी चूत पर अपने हाथ को घुमाने लगा. फिर में कुछ देर बाद उठा और उसके सामने आ गया और उसके बाद मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुहं पर रख और में धीरे धीरे दबाते हुए अपने लंड को उसकी चूत के अंदर करने लगा था, लेकिन उसकी चूत का आकार बहुत छोटा था और मेरा लंड बड़ा, मोटा था इसलिए अंदर जाने से उसको बड़ा दर्द भी हो रहा था, लेकिन में क्या करता मुझ पर तो उस समय उसकी चुदाई का भूत सवार था.

मैंने उसकी चूत पर थोड़ा सा थूक दिया जिसकी वजह से वो गीली चिकनी हो गई और अब में अपना लंड एक जोरदार धक्का देकर उसकी चूत के अंदर जबरदस्ती डालने की कोशिश करने लगा था. फिर सबसे पहले मैंने उसकी चूत पर अपने लंड का टोपा रख दिया, उसको में धक्का देकर अंदर करने लगा.

उसने मुझसे कहा कि तुम इसको मत डालो मुझे बड़ा दर्द हो रहा है, लेकिन मैंने उसकी कोई भी बात नहीं सुनी और अपना लंड में उसकी चूत में डालने लगा वो नीचे पड़ी तड़प रही थी, लेकिन मैंने उसके दर्द की बिल्कुल भी चिंता नहीं की और अपना लंड मैंने उसकी चूत में डाल दिया वो दर्द की वजह से चीखने चिल्लाने लगी थी, लेकिन उसी समय मैंने अपना एक हाथ उसके मुहं पर रख दिया और में उसको अपनी तरफ से झटके मारने लगा था, तब उसको बहुत दर्द हो रहा था और वो रोने भी लगी थी, लेकिन उस वक़्त मुझ पर उसकी चुदाई का भूत सवार था इसलिए में उसको मस्त मजेदार तेज तेज झटके मारता रहा और फिर वो थोड़ी सी ढीली हो गई तो मैंने तब महसूस किया कि धीरे धीरे उसको भी अब मज़ा आने लगा था, इसलिए वो भी नीचे से अपने कूल्हों को हिलाने लगी थी और में उसको वैसे ही धक्के मारता जा रहा था.

फिर कुछ देर बाद जब में झड़ने वाला था, तो मैंने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाल लिया और जब मैंने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकालकर देखा तो उस पर उसकी चूत का खून लगा हुआ था. फिर में उसकी चूत के ऊपर ही अपने लंड को मसलने लगा तो मैंने सोचा कि अगर में धक्के देते समय झड़ गया तो मेरा पूरा वीर्य उसकी चूत के अंदर चला जाता और यह बात सोचकर मैंने लंड को बाहर निकाला था और में अपना लंड उसकी चूत पर मसलता रहा.

उसकी चूत के दाने को उससे टटोलने लगा था, लेकिन कुछ देर के बाद में झड़ गया और मैंने अपना सारा वीर्य उसके पेट पर ही निकाल दिया और फिर में उसके ऊपर ही लेट गया. में उसको किस करने लगा था और कुछ देर तक में उसको किस करता रहा, तब तक मेरा लंड एक बार फिर से तनकर खड़ा हो गया था और में फिर से उसको चोदना शुरू किया और वो मेरा पूरा पूरा साथ देते हुए खुश होकर मज़े से मेरे साथ चुदाई करवाती रही, मैंने उसको उस दिन तीन बार चोदा और हम सभी करीब पांच घंटे तक अपने उस दोस्त के घर में ही रहे.

हम ने अपना काम खत्म करके अपने कपड़े पहने और मैंने दूसरे कमरे में अपने दोस्त को आवाज़ दी. वो लोग भी तब तक अपने काम से फ्री हो चुके थे और वो भी हमारा ही इंतज़ार कर रहे थे. अब हम सभी लोगों ने घर से बाहर निकलकर वापस दरवाजे पर ताला लगा दिया और चाबी अपने दोस्त को देकर वापस आ गए. दोस्तों अगले दिन मुझे पता चला कि वो अपने घर जा चुकी थी और उसके चले जाने का मुझे बड़ा दुख था, लेकिन उसकी उस मस्त मजेदार चुदाई के बारे में सोचकर में खुश भी बहुत था.